बोलने वाली मछली

महाभारत की कहानी

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एक दिन मनु नदी में चल रहा था.

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तभी अचानक एक छोटी मछली

तैरकर उसके हाथों में आई. शक हक हा . /6+7 जी, ८&+ तह

मछली रुपहली रोशनी से चमक रही थी.

"मेरी मदद करो!" उसने कहा. "बड़ी मछली मुझे खाना चाहती है."

मनु ने अपने चुल्लू में पानी भरा और फिर मछली को घर ले गया.

उसने मछली को पानी के एक मटठके में रखा....

"् अरे इसमें तैरने के .. लिए जगह नहीं है!

और उसे छोटी-छोटी चीज़ें खिलाईं. मछली फिर मटके में नहीं समा पाई.

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फिर मनु ने उस मछली को कुएं में डाल दिया...

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मनु ने मछली को खाना नहीं खिलाया, परन्तु.....

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मन को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हआ

करके मुझे समुद्र में ले जाओ," मछली ने प्रार्थना की.

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पर मछली हवा जितनी हल्की निकली!

बज) "उसका भार एक टन होगा!" उसने सोचा

मन को डर लगा.

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मछली समुद्र के किनारे गया और उसने मछली को समुद्र में फेक दिया.

"बहुत धन्यवाद," मछली ने कहा. "कुछ समय बाद एक भीषण बाठ आएगी."

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"अब मेरी बारी है तुम्हारी मदद करने की."

"तुम सभी जीवों को बचाने के लिए एक बहुत बड़ी नाव बनाना."

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इतनी बारिश हुई कि पूरी सिर्फ मनु की नाव ही ज़मीन पानी से भर गई. ' पानी पर तैर रही थी.

“हमें कोइ सुरक्षित स्थान खोजना चाहिए," मन ने कहा,

तेज़ हवाओं के कारण लहरें नाव से आकर टकरा रही थी.

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"नहीं तो हम ड्ब जायेंगे!"

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6२

जब मनु ने अधिरे में देखा तो उसे वो बोलने वाली मछली थी. एक रुपहली रोशनी दिखाई दी.

मछली ने नाव को तूफ़ान में से खींचा. बहुत देर मेहनत करने के बाद वे एक बड़े पहाड़ के पास पहुंचे.

कहा.

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से अपना राज्य ब्रह्ममा ने कहा

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फिर ब्रह्ममा रुपहली रोशनी में विलीन हो गए.

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उसके बाद मनु ने ब्रह्मा को दुबारा नहीं देखा. पर वो देवता की बात को कभी नहीं भूले.

बाढ़ के बाद मनु ने दुनिया को ठुबारा बसाने के लिए कठिन परिश्रम किया.

फिर उन्होंने अपने बाकी समय वहां बहुत विवेकशील तरीके से राज किया.

कहानी प्राचीन भारतीय ग्रन्थ से ली गई है. यह ग्रन्थ दो हज़ार वर्ष पुराना है और उसके अट्ढटारह खंड हैं. इस कहानी में भगवान विष्णु एक मछली का रूप धारण करके दुनिया को प्रलय से बचाते हैं.

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